शिव चालीसा (Shiv Chalisa)

भक्ति भाव से ‘शिव चालीसा’ का दिव्य पाठ पढ़ें और सुनें (Audio)

संपूर्ण श्री शिव चालीसा | शुद्ध पाठ, विधि और 7 महा लाभ | My Mandir

॥ श्री शिव चालीसा ॥

शुद्ध एवं प्रामाणिक स्तोत्र | My Mandir विशेष

श्री शिव चालीसा भगवान शिव को समर्पित एक सिद्ध स्तोत्र है, जिसमें 40 चौपाइयां महादेव की महिमा का वर्णन करती हैं। इसका नियमित शुद्ध पाठ ग्रह दोषों की शांति, शत्रुओं पर विजय और आध्यात्मिक शांति के लिए किया जाता है। सावन और सोमवार के दिन शिव चालीसा पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है।

🔱 विशेष: ‘जय गणेश गिरिजा सुवन’ से शुरू होने वाली यह चालीसा भक्तों के समस्त कष्टों का नाश करती है।
जय गणेश गिरिजा सुवन मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अङ्ग गौर शिर गङ्ग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की हवै दुलारी। बाम अङ्ग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहैं तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहीं दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवि निमेष महँ मारि गिरायउ॥ आप जलन्धर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा करि लीन बचाई॥ किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक अस्तुति करत सदाहीं॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मन्थन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥ कीन्ही दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लङ्क विभीषण दीन्हा॥ सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घट वासी॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहे मन चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर उत्तरदेव निवासो। भक्तन को जब हृदय विकासो॥ शारदा मध्य नाम पुकारो। अभय वरदान मोहि दे डारो॥
अयोध्या भक्त करे विज्ञासा। अब प्रभु पूर्ण करो मम आशा॥ मङ्गसिर छठि हेमन्त ऋतू। संवत चौसठ जान॥
अस्तुति चालीसा शिवहि। पूर्ण कीन कल्यान॥
नित्त नेम कर प्रातः ही पाठ करै चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना पूर्ण करो जगदीशा॥
शिव चालीसा FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. शिव चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए? प्रतिदिन कम से कम एक बार पाठ करना अनिवार्य है। विशेष सिद्धियों और शांति के लिए सोमवार के दिन 11 बार पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
2. क्या पीरियड्स में महिलाएं शिव चालीसा पढ़ सकती हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ और मूर्ति स्पर्श वर्जित है, इसलिए इन दिनों में पाठ करने से बचना चाहिए।
3. शिव चालीसा के पाठ के लिए किस रंग के कपड़े पहनें? शिव पूजा में सफेद या हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना सबसे उत्तम माना जाता है। काले कपड़े पहनकर शिव पूजा करने से बचना चाहिए।
4. क्या शिव चालीसा पढ़ने से शनि दोष शांत होता है? जी हाँ, शिव जी शनिदेव के गुरु हैं। शिव चालीसा का पाठ करने वाले भक्तों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया का बुरा प्रभाव बहुत कम हो जाता है।
5. शिव चालीसा का पाठ करने के मुख्य लाभ? इसके नियमित पाठ से अकाल मृत्यु का भय टलता है, गृह क्लेश दूर होता है और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
6. क्या रात में शिव चालीसा पढ़ सकते हैं? शयन से पहले शिव चालीसा पढ़ना अत्यंत लाभकारी है। यह बुरे सपनों को रोकता है और गहरी नींद लाने में सहायक है।
7. शिव चालीसा की रचना किसने की? शिव चालीसा की रचना श्री अयोध्यादास जी ने की है, जैसा कि चालीसा की अंतिम पंक्तियों में उल्लेख मिलता है।
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