शनि चालीसा (Shani Chalisa)

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संपूर्ण श्री शनि चालीसा | शुद्ध पाठ, विधि और 7 बड़े लाभ | My Mandir

॥ श्री शनि चालीसा ॥

साढ़ेसाती एवं ढैया निवारक पाठ | My Mandir विशेष

श्री शनि चालीसा न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित एक सिद्ध स्तोत्र है। इसमें 40 चौपाइयां शामिल हैं जो शनि देव की महिमा और उनके न्यायप्रिय स्वरूप का वर्णन करती हैं। इसका शुद्ध पाठ शनि की साढ़ेसाती, ढैया और ग्रह दोषों के कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।

⚖️ विशेष: ‘जय गणेश गिरिजा सुवन’ से शुरू होने वाली यह चालीसा भक्तों को अभय प्रदान करती है।
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
नीलाम्बर शशिसन्निभं, कालकाल विभो।
शनैश्चरं प्रणमामि, सर्वदुःख निवारकम्॥
जय जय श्री शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन की दमके॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥ पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन॥
सौरि, मन्द, शनि, दश नामो। विपत्ति त्यागि छावैं सुख धामो॥ निज भक्तन पर कृपा करैहीं। संकट सकल हरण करि लेहीं॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो। कैकेई की मति हरि लीन्हो॥ बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥ रावन की मति बावरी कीन्हा। तज्या कुटुम्ब कुलनाश करा दीन्हा॥
शशि को राहु ग्रास जब कीन्हा। सन्निपात दुख मय कर दीन्हा॥ राजा नल पर जब शनि आया। राजपाट सब धूल मिलाया॥
भुनत मीन कूदन तब लागी। साहुहिं दोष लगावै त्यागी॥ धोबी घर महँ राज करावन। पांडु के वन महँ वासा पावन॥
विक्रम पर जब शनि दसा आई। तेलिहुँ घर महँ कोल्हू चलाई॥ चतुर्थ दसौ शनि दुख दिखरावा। ईशहु मस्तक नग्न कराबा॥
अतनु रूप धरि शनि सुनि आई। अस्तुति करत सबहिं चित लाई॥ जो यह पाठ करै चालीसा। होय सिद्ध साखी जगदीसा॥
विपत्ति काल महँ जो पढ़ि जावै। शनिदेव ताके दुख बिनसावै॥ पाठ करै जो नौ शनिवार। शनिग्रह पीड़ा होय संहार॥
धन जन वैभव बढ़त अपारा। मिटत सकल दुख कलिमल भारा॥ अयोध्यादास भक्त हितकारी। सुयश गावैं शनिदेव तुम्हारी॥
पाठ शनैश्चर देव को, कीन्हों ‘विमल’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
शनि चालीसा FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. शनि चालीसा पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ क्या है? शनि चालीसा का सबसे बड़ा लाभ शनि ग्रह की प्रतिकूल दशाओं (साढ़ेसाती, ढैया) के दौरान होने वाले कष्टों को शांत करना और जीवन में स्थिरता लाना है।
2. क्या शनिवार को दीपक जलाना अनिवार्य है? हाँ, शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे या शनि देव की प्रतिमा के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
3. शनि चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए? कष्टों की तीव्रता के अनुसार 3, 7 या 11 बार पाठ करना लाभकारी होता है। इसे लगातार 40 दिनों तक पढ़ना ‘सिद्ध’ माना जाता है।
4. क्या शनि देव क्रूर देवता हैं? नहीं, शनि देव क्रूर नहीं बल्कि न्यायप्रिय देवता हैं। वे व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि चालीसा का पाठ हमारे कर्मों की शुद्धि की प्रार्थना है।
5. पाठ करते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए? शनि चालीसा का पाठ करते समय पश्चिम दिशा (जो शनि की दिशा है) या उत्तर दिशा की ओर मुख करना श्रेष्ठ माना जाता है।
6. क्या शनि चालीसा के पाठ से धन लाभ होता है? जी हाँ, शनि देव को कर्मफल दाता माना गया है। उनके आशीर्वाद से व्यापार और करियर की बाधाएं दूर होती हैं, जिससे आर्थिक समृद्धि आती है।
7. शनि चालीसा पढ़ने के बाद क्या करना चाहिए? पाठ के बाद शनि देव की आरती करें और संभव हो तो काली वस्तुओं (जैसे काला तिल, उड़द, या लोहा) का दान निर्धनों को करें।
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